भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नाक़ाबिल ए फ़रामोश / ज़िया फ़तेहाबादी

Kavita Kosh से
Ravinder Kumar Soni (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 07:16, 7 अप्रैल 2011 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दिल को दीवाना बनाना याद है
मस्तियाँ हर सू लुटाना याद है
सहन ए गुलशन में बसद हुस्न ओ जमाल
रोज़ ताज़ा गुल खिलाना याद है
मुस्करा कर देखना मेरी तरफ़
देख कर फिर मुस्कराना याद है
मुझ से रफ़्ता रफ़्ता वो खुलना तेरा
नीची नज़रों को उठाना याद है

कर गए हैं दिल में घर कुछ इस तरह
मैं वो बीते दिन भुला दूँ किस तरह