भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"नाम-रूप का भेद / काका हाथरसी" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
 
पंक्ति 3: पंक्ति 3:
 
|रचनाकार=काका हाथरसी
 
|रचनाकार=काका हाथरसी
 
}}
 
}}
 +
{{KKCatKavita}}
 
[[Category:हास्य रस]]
 
[[Category:हास्य रस]]
 +
<poem>
 
नाम - रूप के भेद पर कभी किया है ग़ौर ?
 
नाम - रूप के भेद पर कभी किया है ग़ौर ?
 
 
नाम मिला कुछ और तो शक्ल - अक्ल कुछ और
 
नाम मिला कुछ और तो शक्ल - अक्ल कुछ और
 
 
शक्ल - अक्ल कुछ और नयनसुख देखे काने
 
शक्ल - अक्ल कुछ और नयनसुख देखे काने
 
 
बाबू सुंदरलाल बनाये ऐंचकताने
 
बाबू सुंदरलाल बनाये ऐंचकताने
 
 
कहँ ‘ काका ' कवि , दयाराम जी मारें मच्छर
 
कहँ ‘ काका ' कवि , दयाराम जी मारें मच्छर
 
 
विद्याधर को भैंस बराबर काला अक्षर
 
विद्याधर को भैंस बराबर काला अक्षर
 
 
  
 
मुंशी चंदालाल का तारकोल सा रूप
 
मुंशी चंदालाल का तारकोल सा रूप
 
 
श्यामलाल का रंग है जैसे खिलती धूप
 
श्यामलाल का रंग है जैसे खिलती धूप
 
 
जैसे खिलती धूप , सजे बुश्शर्ट पैंट में -
 
जैसे खिलती धूप , सजे बुश्शर्ट पैंट में -
 
 
ज्ञानचंद छै बार फ़ेल हो गये टैंथ में
 
ज्ञानचंद छै बार फ़ेल हो गये टैंथ में
 
 
कहँ ‘ काका ' ज्वालाप्रसाद जी बिल्कुल ठंडे
 
कहँ ‘ काका ' ज्वालाप्रसाद जी बिल्कुल ठंडे
 
 
पंडित शांतिस्वरूप चलाते देखे डंडे
 
पंडित शांतिस्वरूप चलाते देखे डंडे
 
 
  
 
देख अशर्फ़ीलाल के घर में टूटी खाट
 
देख अशर्फ़ीलाल के घर में टूटी खाट
 
 
सेठ भिखारीदास के मील चल रहे आठ
 
सेठ भिखारीदास के मील चल रहे आठ
 
 
मील चल रहे आठ , करम के मिटें न लेखे
 
मील चल रहे आठ , करम के मिटें न लेखे
 
 
धनीराम जी हमने प्रायः निर्धन देखे
 
धनीराम जी हमने प्रायः निर्धन देखे
 
 
कहँ ‘ काका ' कवि , दूल्हेराम मर गये कुँवारे
 
कहँ ‘ काका ' कवि , दूल्हेराम मर गये कुँवारे
 
 
बिना प्रियतमा तड़पें प्रीतमसिंह बेचारे
 
बिना प्रियतमा तड़पें प्रीतमसिंह बेचारे
 
 
 
  
 
पेट न अपना भर सके जीवन भर जगपाल
 
पेट न अपना भर सके जीवन भर जगपाल
 
 
बिना सूँड़ के सैकड़ों मिलें गणेशीलाल
 
बिना सूँड़ के सैकड़ों मिलें गणेशीलाल
 
 
मिलें गणेशीलाल , पैंट की क्रीज़ सम्हारी
 
मिलें गणेशीलाल , पैंट की क्रीज़ सम्हारी
 
 
बैग कुली को दिया , चले मिस्टर गिरधारी
 
बैग कुली को दिया , चले मिस्टर गिरधारी
 
 
कहँ ‘ काका ' कविराय , करें लाखों का सट्टा
 
कहँ ‘ काका ' कविराय , करें लाखों का सट्टा
 
 
नाम हवेलीराम किराये का है अट्टा
 
नाम हवेलीराम किराये का है अट्टा
 
 
  
 
चतुरसेन बुद्धू मिले , बुद्धसेन निर्बुद्ध
 
चतुरसेन बुद्धू मिले , बुद्धसेन निर्बुद्ध
 
 
श्री आनंदीलाल जी रहें सर्वदा क्रुद्ध
 
श्री आनंदीलाल जी रहें सर्वदा क्रुद्ध
 
 
रहें सर्वदा क्रुद्ध , मास्टर चक्कर खाते
 
रहें सर्वदा क्रुद्ध , मास्टर चक्कर खाते
 
 
इंसानों को मुंशी तोताराम पढ़ाते
 
इंसानों को मुंशी तोताराम पढ़ाते
 
 
कहँ ‘ काका ', बलवीर सिंह जी लटे हुये हैं
 
कहँ ‘ काका ', बलवीर सिंह जी लटे हुये हैं
 
 
थानसिंह के सारे कपड़े फटे हुये हैं
 
थानसिंह के सारे कपड़े फटे हुये हैं
 
 
  
 
बेच रहे हैं कोयला , लाला हीरालाल
 
बेच रहे हैं कोयला , लाला हीरालाल
 
 
सूखे गंगाराम जी , रूखे मक्खनलाल
 
सूखे गंगाराम जी , रूखे मक्खनलाल
 
 
रूखे मक्खनलाल , झींकते दादा - दादी
 
रूखे मक्खनलाल , झींकते दादा - दादी
 
 
निकले बेटा आशाराम निराशावादी
 
निकले बेटा आशाराम निराशावादी
 
 
कहँ ‘ काका ' कवि , भीमसेन पिद्दी से दिखते
 
कहँ ‘ काका ' कवि , भीमसेन पिद्दी से दिखते
 
 
कविवर ‘ दिनकर ’ छायावदी कविता लिखते
 
कविवर ‘ दिनकर ’ छायावदी कविता लिखते
 
 
  
 
तेजपाल जी भोथरे , मरियल से मलखान
 
तेजपाल जी भोथरे , मरियल से मलखान
 
 
लाला दानसहाय ने करी न कौड़ी दान
 
लाला दानसहाय ने करी न कौड़ी दान
 
 
करी न कौड़ी दान , बात अचरज की भाई
 
करी न कौड़ी दान , बात अचरज की भाई
 
 
वंशीधर ने जीवन - भर वंशी न बजाई
 
वंशीधर ने जीवन - भर वंशी न बजाई
 
 
कहँ ‘ काका ' कवि , फूलचंद जी इतने भारी
 
कहँ ‘ काका ' कवि , फूलचंद जी इतने भारी
 
 
दर्शन करते ही टूट जाये कुर्सी बेचारी
 
दर्शन करते ही टूट जाये कुर्सी बेचारी
 
 
 
  
 
खट्टे - खारी - खुरखुरे मृदुलाजी के बैन
 
खट्टे - खारी - खुरखुरे मृदुलाजी के बैन
 
 
मृगनयनी के देखिये चिलगोजा से नैन
 
मृगनयनी के देखिये चिलगोजा से नैन
 
 
चिलगोजा से नैन , शांता करतीं दंगा
 
चिलगोजा से नैन , शांता करतीं दंगा
 
 
नल पर नहातीं , गोदावरी , गोमती , गंगा
 
नल पर नहातीं , गोदावरी , गोमती , गंगा
 
 
कहँ ‘ काका ' कवि , लज्जावती दहाड़ रही हैं
 
कहँ ‘ काका ' कवि , लज्जावती दहाड़ रही हैं
 
 
दर्शन देवी लंबा घूँघट काढ़ रही हैं
 
दर्शन देवी लंबा घूँघट काढ़ रही हैं
 
 
  
 
अज्ञानी निकले निरे पंडित ज्ञानीराम
 
अज्ञानी निकले निरे पंडित ज्ञानीराम
 
 
कौशल्या के पुत्र का रक्खा दशरथ नाम
 
कौशल्या के पुत्र का रक्खा दशरथ नाम
 
 
रक्खा दशरथ नाम , मेल क्या खूब मिलाया
 
रक्खा दशरथ नाम , मेल क्या खूब मिलाया
 
 
दूल्हा संतराम को आई दुल्हन माया
 
दूल्हा संतराम को आई दुल्हन माया
 
 
‘ काका ' कोई - कोई रिश्ता बड़ा निकम्मा
 
‘ काका ' कोई - कोई रिश्ता बड़ा निकम्मा
 
 
पार्वती देवी हैं शिवशंकर की अम्मा
 
पार्वती देवी हैं शिवशंकर की अम्मा
 +
</poem>

00:17, 29 अक्टूबर 2009 के समय का अवतरण

नाम - रूप के भेद पर कभी किया है ग़ौर ?
नाम मिला कुछ और तो शक्ल - अक्ल कुछ और
शक्ल - अक्ल कुछ और नयनसुख देखे काने
बाबू सुंदरलाल बनाये ऐंचकताने
कहँ ‘ काका ' कवि , दयाराम जी मारें मच्छर
विद्याधर को भैंस बराबर काला अक्षर

मुंशी चंदालाल का तारकोल सा रूप
श्यामलाल का रंग है जैसे खिलती धूप
जैसे खिलती धूप , सजे बुश्शर्ट पैंट में -
ज्ञानचंद छै बार फ़ेल हो गये टैंथ में
कहँ ‘ काका ' ज्वालाप्रसाद जी बिल्कुल ठंडे
पंडित शांतिस्वरूप चलाते देखे डंडे

देख अशर्फ़ीलाल के घर में टूटी खाट
सेठ भिखारीदास के मील चल रहे आठ
मील चल रहे आठ , करम के मिटें न लेखे
धनीराम जी हमने प्रायः निर्धन देखे
कहँ ‘ काका ' कवि , दूल्हेराम मर गये कुँवारे
बिना प्रियतमा तड़पें प्रीतमसिंह बेचारे

पेट न अपना भर सके जीवन भर जगपाल
बिना सूँड़ के सैकड़ों मिलें गणेशीलाल
मिलें गणेशीलाल , पैंट की क्रीज़ सम्हारी
बैग कुली को दिया , चले मिस्टर गिरधारी
कहँ ‘ काका ' कविराय , करें लाखों का सट्टा
नाम हवेलीराम किराये का है अट्टा

चतुरसेन बुद्धू मिले , बुद्धसेन निर्बुद्ध
श्री आनंदीलाल जी रहें सर्वदा क्रुद्ध
रहें सर्वदा क्रुद्ध , मास्टर चक्कर खाते
इंसानों को मुंशी तोताराम पढ़ाते
कहँ ‘ काका ', बलवीर सिंह जी लटे हुये हैं
थानसिंह के सारे कपड़े फटे हुये हैं

बेच रहे हैं कोयला , लाला हीरालाल
सूखे गंगाराम जी , रूखे मक्खनलाल
रूखे मक्खनलाल , झींकते दादा - दादी
निकले बेटा आशाराम निराशावादी
कहँ ‘ काका ' कवि , भीमसेन पिद्दी से दिखते
कविवर ‘ दिनकर ’ छायावदी कविता लिखते

तेजपाल जी भोथरे , मरियल से मलखान
लाला दानसहाय ने करी न कौड़ी दान
करी न कौड़ी दान , बात अचरज की भाई
वंशीधर ने जीवन - भर वंशी न बजाई
कहँ ‘ काका ' कवि , फूलचंद जी इतने भारी
दर्शन करते ही टूट जाये कुर्सी बेचारी

खट्टे - खारी - खुरखुरे मृदुलाजी के बैन
मृगनयनी के देखिये चिलगोजा से नैन
चिलगोजा से नैन , शांता करतीं दंगा
नल पर नहातीं , गोदावरी , गोमती , गंगा
कहँ ‘ काका ' कवि , लज्जावती दहाड़ रही हैं
दर्शन देवी लंबा घूँघट काढ़ रही हैं

अज्ञानी निकले निरे पंडित ज्ञानीराम
कौशल्या के पुत्र का रक्खा दशरथ नाम
रक्खा दशरथ नाम , मेल क्या खूब मिलाया
दूल्हा संतराम को आई दुल्हन माया
‘ काका ' कोई - कोई रिश्ता बड़ा निकम्मा
पार्वती देवी हैं शिवशंकर की अम्मा