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नारी / कुलवंत सिंह

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मानव पर ऋण -
नारी का.
नारी  !
जिसने माँ बन -
जन्म दिया मानव को.
 
ईश्वर पर ऋण -
नारी का.
ईश्वर !
जिसने जन्म लिया हर बार
एक मां की कोख से.

प्रकृति पर ऋण -
नारी का.
प्रकृति !
जिसने सौंपा यह महान उद्देश्य
नारी के हाथ.