Last modified on 14 जून 2015, at 00:11

निर्वासन का घर / तेनजिन त्सुंदे

चू रही थी हमारी खपरैलों वाली छत
और चार दीवारें ढह जाने की धमकी दे रही थीं
लेकिन हमें बहुत जल्द लौट जाना था अपने घर.

हमने अपने घरों के बाहर
पपीते उगाए,
बगीचे में मिर्चें,
और बाड़ों के वास्ते चंगमा[1],
तब गौशालों की फूँस ढँकी छत से लुढकते आए कद्दू --
नांदों से लडख़ड़ाते निकले बछड़े,
छत पर घास
फलियों में कल्ले फूटे
और बेलें दीवारों पर चढऩे लगीं,
खिड़की से होकर रेंगते आने लगे मनीप्लाण्ट,
ऐसा लगता है हमारे घरों की जड़ें उग आई हों ।

बाड़ें अब बदल चुकी हैं जंगल में
अब मैं कैसे बताऊँ अपने बच्चों को
कि कहाँ से आये थे हम ?

शब्दार्थ
  1. बेंत जैसा लचीले तने वाला एक पेड़