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पंखिडा रे उड़ी जाजे पावागढ़ रे / गुजराती लोक गरबा

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पंखिडा रे उडी ने जाजो पावागढ़ रे

मारी महाकाली ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

मरी कालका माँ ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...


ओला गाम न सुथारी वीरा वहला आवो रे...

मारी महाकाली ने माटे रुडो बाजोट लावो रे

मारी कालका मां ने रुडो बाजोट लावो रे..

सारो लावो सुंदर लावो वहला आवो रे

मारी महाकाली ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

मारी कालका माँ ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

पंखिडा रे ओ पंखिडा रे...


ओला ओला गाम न रे मणीहारा वीरा वहला आवो रे

मारी महाकाली ने माटे रुडो चुडलो लावो रे

मारी कालका माँ ने माटे रुडो चुडलो लावो रे

सारो लावो सुंदर लावो वहला आवो रे

मारी महाकाली ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

मारी कालका माँ ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

पंखिडा रे ओ पंखिडा रे...


ओला गाम न रे सोनिडा वीरा वहला आवो रे

मारी महाकाली न माटे रूडा झांझर लावो रे

मारी कालका मां ने रूडा झांझर लावो रे

सारा लावो सुंदर लावो वहला आवो रे

मारी महाकाली ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

मारी कालका माँ ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

पंखिडा रे ओ पंखिडा रे...


ओला गाम ना रे दोशिडा वीरा वहला आवो रे

वीरा वहला आवो रे

मारी महाकाली ने माटे रूडी चुंदरी लावो रे

मारी कालका माँ ने काल रूडी चुंदरी लावो रे

सारी लावो सुंदर लावो वहला आवो रे

मारी महाकाली ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

मारी कालका माँ ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

पंखिडा रे ओ पंखिडा रे...


ओला गाम ना रे कुम्भारी वीरा वहला आवो रे

मारी महाकाली ने माटे रुडो गरबो लावो रे

मारी कालका माँ ने काल रुडो गरबो लावो रे

सारो लावो सुंदर लावो वहला आवो रे..

मारी महाकाली ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

मारी कालका माँ ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...

पंखिडा रे ओ पंखिडा रे...