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पतझड़ / हरिवंश राय बच्चन / विलियम बटलर येट्स

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उन लम्बे पत्तों पर पतझर
जिनसे हम पर प्यार कभी बरसा करता था,
औ’ उन चूहों पर भी जो
जौ की बाल में छिपे हुए हैं;
पीले पत्ते इस तरु के
जिसके नीचे हम खड़े हुए हैं,
पीली-गीली हैं सारी पत्तियाँ
जंगली झरबरी की
खड़ी निकट के
इन ढूहों पर !

और प्यार ढलने की बेला घिर आई है —
मन उदास है,
प्राण थके हैं,
जी भारी है ।
जो बसन्त आनेवाला है
हमें न बिल्कुल ही बिसरा दे,
एक दूसरे से, आओ, हम आज विदा लें,
चुम्बन लेकर
अध-सूखे अधरों से
अध-भीगी पलकों पर !

मूल अँग्रेज़ी से हरिवंश राय बच्चन द्वारा अनूदित

लीजिए अब पढ़िए यही कविता मूल अँग्रेज़ी में
              William Butler Yeats
          The Falling of the Leaves

Autumn is over the long leaves that love us,
And over the mice in the barley sheaves;
Yellow the leaves of the rowan above us,
And yellow the wet wild-strawberry leaves.
  
The hour of the waning of love has beset us,
And weary and worn are our sad souls now;
Let us part, ere the season of passion forget us,
With a kiss and a tear on thy drooping brow.