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पहिले त तिम्रो जीवनको / सुमन पोखरेल

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पहिले त तिम्रो जीवनको शृङ्गार भएर सजिएँ
आज हेर के भयो सपना टुटेझैँ टाढिएँ

साथ दिउँला लामो भन्थेँ
ज्यादै क्षणिक रहेछ जीवन
एकछिनको सिन्दुर भएर पुछिएँ
केही लुङ पोते भएर चुँडिएँ

मायामा भावना साटुँला भन्थेँ
अति नै कठोर रहेछ मरन
केहीबेरको टीका भएर भाँचिएँ
अलिकति चुरा भएर टुक्रिएँ