भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पीतल की बालटी आले / हरियाणवी

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 15:57, 17 जुलाई 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |भाषा=हरियाणवी |रचनाकार=अज्ञात |संग्रह= }} {{...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पीतल की बालटी आले ढोवै सै बालू रेत
‘रे बीरा बखतै दिल्ली जाइये लाइये गुलाबी छींट’
‘हे मैं सारे सहर में घूम्या न पाई गुलाबी छींट
मेरा बाबल बखते उठ्या ल्याया गुलाबी छींट
मेरी भावज रोवण लाग्यी ‘म्हारी घर का कर दिया नास’
‘कार्तिक की करी लामणी भादवे का खोदा न्यार
चलती ने ते मिले जवाब’