Last modified on 30 सितम्बर 2008, at 01:57

पेंटिंग-1 / गुलज़ार

रात कल गहरी नींद में थी जब

एक ताज़ा-सफ़ेद कैनवस पर

आतिशीं, लाल -सुर्ख रंगों से

मैं ने रौशन किया था इक सूरज-

सुबह तक जल गया था वह कैनवस

राख बिखरी हुई थी कमरे में