भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रान पियारो मिल्यो सपने मैं / मतिराम

Kavita Kosh से
Pratishtha (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 21:03, 29 जुलाई 2009 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=मतिराम }} Category:पद <poeM>प्रान पियारो मिल्यो सपने मै...)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

प्रान पियारो मिल्यो सपने मैं, परी जब नैंसुक नींद निहोरैं।
कंत को आगम ज्यों ही जगाय, कह्यो सखी बोल पियूष निचोरैं॥

यों 'मतिराम भयो हिय मैं सुख, बाल के बालम सों दृग जोरैं।
जैसे मिहीं पट मैं चटकीलो, चढै रंग तीसरी बार के बोरैं॥