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प्रेम-2 / सुशीला पुरी

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प्रेम
एक बहुत ऊँचा
पेड़ है
जिस पर चढ़ना मुश्किल

बस,
करनी होती है प्रतीक्षा
कि आएगा कोई पक्षी
जो खाकर ही सही
गिरा देगा एक मीठा फल,

और जब
मिलता है वो
तो उसका काफ़ी हिस्सा
पहले ही खाया जा चुका होता है...!