भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
© कॉपीराइट योगदानकर्ता कविता कोश टीम

बंगाल-2 / कुमार अनुपम

Kavita Kosh से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

मैं सूर्यास्त शब्द को काट
कविता को ठीक करना चाहता हूँ – विनोद कुमार शुक्ल

मेरे क़स्बे मे जब उतरा था दल मूर्तिकारों का
मैंने बंगाल को सुना था

दीघा के तट पर
देखा मैंने बंगाल
      को उगते हुए देखा

हावड़ा के झूले पर
      झुले पर हावड़ा को झूलते हुए
भरते हुए पेंग की साँस
शांतिनिकेतन नन्दनपैलेस
मालदह वर्धमान
रोमांचित व्यस्त बंगाल
बंगाल मस्त बंगाल

देखा
नावों के नारंगी मस्तूल-सा
         ज़ोर पर हवा के मुड़ता हुआ बंगाल
दिल्ली गुजरात मुम्बई
और जाने कहाँ की रेलों में
लुकता हुआ भागता हुआ

अस्त होता हुआ डायमंडहार्बर पर
         सोनागाछी पर नष्ट होता हुआ बंगाल
देर रात
सुना न जाता था
समुद्र का छाती पीट पीट कर चीखना –
बं गा ल….. बं गा ल
बं गा ल….. बं गा ल

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची

गद्य कोश

» हिन्दी में अनुवाद

» विभाग

» भाषाएँ और भी

» महत्त्वपूर्ण संदेश
  • फ़िलहाल नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। कृपया अपनी रचनाएँ कोश में जोड़ने के लिए अभी आवेदन न करें। आगे की सूचना इसी जगह प्रकाशित की जाएगी।
  • कविता कोश से संबंधित हर जानकारी पाने के लिए पढ़ें: कविता कोश: हिन्दी काव्य में जुड़ता एक नया आयाम

» प्रादेशिक कविता कोश

» अन्य महत्त्वपूर्ण पन्नें

» अन्य पन्नें