भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बड़ा बाघ / सुधीर बर्त्वाल

Kavita Kosh से
Abhishek Amber (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 11:07, 21 अप्रैल 2018 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=सुधीर बर्त्वाल |अनुवादक= |संग्रह= }...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

छ्व्टा मा सूणी छो कि
जु ग्वोरूं तै मारदु
सु ग्वर्या बाघ होंदु।
अर जु मनख्यूँ तै मारदु
सु मनख्या बाघ होंदु।
पर अब पता चलि कि,
जौन चूसलिन हमारी आस,
हमारा संस्कार।
हमारी दया, लाड, त्याग
अर हमारा बोटं्या रीति-रिवाज।
सी...............
यूं से भी बड़ा बाघ होंदा।