भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बड़ा बेसुरा बाजा / प्रकाश मनु

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 16:53, 16 फ़रवरी 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=प्रकाश मनु |अनुवादक= |संग्रह=बच्च...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

टोपी पहने, माइक सँभाले
बंदर राजा आए,
खूब अकड़कर, मटक-मटककर
ढेरों गाने गाए।
हाथ जोड़कर जनता को, फिर
असली मकसद पर आए,
अपना वोट मुझी को देना
कह करके मुसकाए।

इतने में आई बंदरिया
बोली-बंदर राजा,
राजनीति में पेंच बहुत हैं
बड़ा बेसुरा बाजा।
चलकर पेड़ों की छाया में
खाएँगे मीठे फल,
बड़ा बुरा है नेताओं का
यह चुनाव का दंगल!