भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बन्ने के नैना जादू के बान / हिन्दी लोकगीत

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 13:11, 5 दिसम्बर 2010 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बन्ने के नैना जादू के बान, बन्ने के नैना जादू के बान
मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया, मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया ।।

शीश रेशम की पगिया सोहे, मोरे पन्खा की है सिरमोर
मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया, मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया ।।

कान बन्ने के कुन्डल सोहे, मोतियन की है चमकार
मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया, मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया ।।

श्याम बदन पर पियरो जामा, मुनिमन हरत लुभान
मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया, मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया ।।

संग सोहे राजों की बेटी, रुक्मिनी बाम बखान
मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया, मैं वारी-वारी जाऊँ रसिया ।।