भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बहुत दिन के बाद / उर्मिल सत्यभूषण

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:56, 19 अक्टूबर 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=उर्मिल सत्यभूषण |अनुवादक= |संग्रह...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अनवरत युद्धों के बाद
जब देह शत सहस्र
जख़्मों से क्षत-विक्षत हो जायेगी
जिजीवषा थक जायेगी
आत्मा निकलने को बेचैन
हो उठेगी
तो अपनी थाती सौंप देना वंशजों को
अपना कवच,
तलवार, ढाल, कृपाण
संजोये हुये अस्त्र-शस्त्र
तमगे, उपलब्धियाँ
लफ़्जो के कागज़ी गुलदस्ते
उनके हवाले कर देना
उनके पुख्ता किये
कंधों पर डाल कर बोझ
अपनी देह की कम्बली
उतार देना चुपचाप
पर अभी नहीं
बहुत दिन के बाद।