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बुनि देहो हे मालिन, नूनू के हे सेहला / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

इस गीत में मालिन से मौर बनाने का अनुरोध किया गया है। मालिन सामग्री का अभाव दिखलाकर अपनी असमर्थता प्रकट करती है। लेकिन, इन चीजों के प्राप्त होने का उपयुक्त स्थान बतलाया गया है, जहाँ से वह आसानी से इन चीजों को प्राप्त कर सकती है। मालिन मौर गूँथने के लिए पर्याप्त पुरस्कार चाहती है, जिस कारण वह प्रारंभ में बहाने बना रही है।

बुनि देहो हे मालिन, नूनू[1] के हे सेहला।
हमरिओ देस हे मालिन, ठुठिला न कोरिला[2]
कैसे बुनभ हे मालिन, नूनू केर हे सेहला॥1॥
लदिया[3] किनारे हे मालिन, ठुठिला कोरिलबा।
से बुनि देहो हे मालिन, नूनू केर सेहला॥2॥
लदी किनारे नै छै, ठुठिला हे कोरिलबा।
कैसे बुनबै रामा, नूनू केर हे सेहला॥3॥

शब्दार्थ
  1. बच्चे के लिए प्यार का संबोधन
  2. एक प्रकार का जलीय पौधा, जिसके डंठल से मौर बनते हैं
  3. नदी के