भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
© कॉपीराइट     योगदानकर्ता     कविता कोश टीम

बेमौत मर गए हम/रमा द्विवेदी

Kavita Kosh से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज


हर साँस दे दी तुमको,
अपने न बन सके तुम,
माना था तुमको हीरा,
कंकर निकल गए तुम ।

रोपा था प्रेम-पौधा,
सोचा था यह फलेगा,
लेकिन सितम से तेरे,
जड़ से उखड़ गए हम।

देखा था एक सपना,
इक जान बन जिएंगे ,
टूटा है दिल कुछ ऐसे ,
टुकड़े न गिन सके हम ।

जितने करीब आए,
तुम दूर उतने हो गए,
सोचा था क्या-क्या हमने,
बेमौत मर गए हम ।

ख्वाहिश यही थी दिल की
सब तुझपे मैं लुटा दूँ,
बदले हैं तुमने रस्ते,
कुछ भी न कर सके हम।

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची

गद्य कोश

» विभाग

» अन्य भाषाओं से

» महत्त्वपूर्ण संदेश
  • फ़िलहाल नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। कृपया अपनी रचनाएँ कोश में जोड़ने के लिए अभी आवेदन न करें। आगे की सूचना इसी जगह प्रकाशित की जाएगी।
  • कविता कोश से संबंधित हर जानकारी पाने के लिए पढ़ें: कविता कोश: हिन्दी काव्य में जुड़ता एक नया आयाम

» प्रादेशिक कविता कोश

» अन्य महत्त्वपूर्ण पन्नें

» अन्य पन्नें