भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

भजन सुख क्यों छांडे मन धीर / शिवदीन राम जोशी

Kavita Kosh से
Kailash Pareek (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 18:51, 26 जनवरी 2012 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=शिवदीन राम जोशी | }} <poem> भजन सुख क्यो...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

भजन सुख क्यों छांडे मन धीर।
जां सुख ते उपजत उर आनंद, करें कृपा रघुबीर।
विषय वासना भूल न त्यागे, कैसी नींद तनिक ना जागे,
मौत सिराने खड़ी हुई है, भव भय तां में पीर।
नेम धर्म व्रत पल में छांडे, काम क्रोध छांडे नहीं बा़ढ़े,
लोभ मोह की पहिन रहा तू, लोहे की जंजीर।
ये दुनियां, दुनियां भदरंगी, देख रहा क्यू ये हैं नंगी,
रहने दे, ढ़क परदा नैना, मति बहावे नीर।
कहे शिवदीन संतजन साथी,सिवा राम के कौन संगाती,
सज्जन संत उबारे भव से, लगजा परली तीर।