भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

भारत धारत धीर धीर का धीरज छूटे / शिवदीन राम जोशी

Kavita Kosh से
Kailash Pareek (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:18, 20 जनवरी 2012 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

भारत धारत धीर धीर का धीरज छूटे,
देश भक्त बलवान डरें क्यों चौडे लूटे।
खद्दर चद्दर ओढ यही है बख्तर रण का,
धन्य शिरोमणी देश हो गया अग कण-कण का।
दिन में अरु दोपहर में लूटे आधी रात,
कौन सुने शिवदीन अब दुःखी जनों की बात।
राम गुण गायरे।