भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

भीड़ या मॉब लिंचिंग / ज्योति रीता

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 00:22, 16 दिसम्बर 2020 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=ज्योति रीता |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCat...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हत्यारों ने ढूंढ लिया है
हत्या का नया तरीका
जिसमें साँप भी मरता है
और लाठी भी नहीं टूटती
वे साजिशों के तहत
हमला करते हैं
मारकर बेशर्मी से रफूचक्कर हो जाते हैं

ना फिर कोई सुराग
ना कोई हत्यारा
पुलिस ढूंढती है उन्हें फाइलों में
रोज छापेमारी
और सुबूत खोजे जाते हैं
सरकारें दोषारोपण से बच जाया करती है
मुआवजे देकर
इस बौखलाहट को शांत किया जाता है
जो हुआ बुरा हुआ
कहकर सांत्वना देते हैं
और सब सामान्य स्थिर

भीड़ ने दूसरे
निहत्थे की
तलाश जारी की है।।