भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

भैसी निकरी भंवरकली से / बघेली

Kavita Kosh से
Dhirendra Asthana (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:19, 20 मार्च 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |भाषा=बघेली |रचनाकार=अज्ञात |संग्रह= }} {{KKCatBag...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बघेली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

भैसी निकरी भंवरकली से छाहुर लिहिन बेराय
दाम-दाम दे माता भैइसी बेसाहन जांव
मरि ना गये तै अहिर के बालक मरिउ न तोरे ज्ञान
छेरी भेड़ी का दाम नहीं घर तै भैइसि बेसाहन जाव
दाम दाम दे माता तै रे हीरा कनी भंजाव
उइं भइसी ना जान्या माता उनखे ठकुरौ लिखे लिलार
गांव का राजा बड़ा शिकारी मारइ सांभर मिरगी रोझ
लोट डबर से पड़िया निकरी राजन लेय बेराय
भूरी भूरी भंइसी चकही चकही सींग
वहै खोर नित निकरै लाग रजन कै लागइ डीठ
कहना कै तै अहिरा आहे काह नाव है तोर
धौ तो चरू ये घर की आही धौ तै तकै बड़खेर
गंगातीर केर अहिरा आहेन छाहुर नाम हमार
दूं तौ चरू आही घर कै बेढ़न जायं बड़खेर