भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मन का रिश्ता है / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

Kavita Kosh से
वीरबाला (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 21:46, 9 जुलाई 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' }} {{KKCatKavita...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

2
माना धागे टूट गए हैं
संगी साथी छूट गए हैं
विश्वास यही रखना मन में
हम तुमसे कभी न छूटेंगे।

जिनको भाता नफ़रत करना
हित-साधन ही जीना -मरना
जब तक उनका साथ रहेगा
वे तो हरदम सब लूटेंगे ।

जो मतलब के मीत रहे थे
टूट जाएँगे कुछ से नाते
तुमसे तो मन का रिश्ता है
न किसी के तोड़े टूटेंगे।

कुछ कच्चे घट फूट गए हैं
कुछ सपने भी रूठ गए हैं
ईश्वर की तो ईश्वर जाने
हम तुमसे कभी न रूठेंगे।