भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"ममतामयी ! / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
 
पंक्ति 6: पंक्ति 6:
 
[[Category:हाइकु]]
 
[[Category:हाइकु]]
 
<poem>
 
<poem>
 +
76
 
पलकें चूमूँ
 
पलकें चूमूँ
 
तुम्हें गले लगाऊँ
 
तुम्हें गले लगाऊँ
 
जीवन पाऊँ।
 
जीवन पाऊँ।
2
+
77
 
क्षितिज पार
 
क्षितिज पार
 
केवल इंतज़ार
 
केवल इंतज़ार
 
धरा- गगन।
 
धरा- गगन।
3
+
78
 
महामिलन
 
महामिलन
 
सृष्टि झूमे खुशी से
 
सृष्टि झूमे खुशी से
 
मादक मन।
 
मादक मन।
4
+
79
 
ममतामयी !
 
ममतामयी !
 
तुझसे रस पाया
 
तुझसे रस पाया
 
जीना सिखाया।
 
जीना सिखाया।
5
+
80
 
तुम न होते
 
तुम न होते
 
रस मर ही जाता
 
रस मर ही जाता
 
कौन लुभाता।
 
कौन लुभाता।
6
+
81
 
रस छलके
 
रस छलके
 
तेरे नयनों से जो
 
तेरे नयनों से जो
 
मुझे सींचता।
 
मुझे सींचता।
7
+
82
 
वाणी का जादू
 
वाणी का जादू
 
बनके आलिंगन
 
बनके आलिंगन
 
मुझे है बाँधे।
 
मुझे है बाँधे।
8
+
83
 
अधर -प्यास
 
अधर -प्यास
 
बनके मधुमास
 
बनके मधुमास
 
मुझे टेरती।
 
मुझे टेरती।
9
+
84
 
हो जाऊँ लय
 
हो जाऊँ लय
 
तुम में  एक दिन
 
तुम में  एक दिन
 
वही है मुक्ति।
 
वही है मुक्ति।
10
+
85
 
कहीं न जाऊँ
 
कहीं न जाऊँ
 
छुप तेरे सीने में
 
छुप तेरे सीने में

23:13, 5 मई 2019 के समय का अवतरण

76
पलकें चूमूँ
तुम्हें गले लगाऊँ
जीवन पाऊँ।
77
क्षितिज पार
केवल इंतज़ार
धरा- गगन।
78
महामिलन
सृष्टि झूमे खुशी से
मादक मन।
79
ममतामयी !
तुझसे रस पाया
जीना सिखाया।
80
तुम न होते
रस मर ही जाता
कौन लुभाता।
81
रस छलके
तेरे नयनों से जो
मुझे सींचता।
82
वाणी का जादू
बनके आलिंगन
मुझे है बाँधे।
83
अधर -प्यास
बनके मधुमास
मुझे टेरती।
84
हो जाऊँ लय
तुम में एक दिन
वही है मुक्ति।
85
कहीं न जाऊँ
छुप तेरे सीने में
स्वर्ग पा जाऊँ।
-०-