भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मिलना / एवा लिसा मान्नेर

Kavita Kosh से
हेमंत जोशी (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 20:42, 17 मार्च 2009 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=एवा लिसा मान्नेर }} <poem> तुम्हें दिखाऊँगी वह राह ज...)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


तुम्हें दिखाऊँगी वह राह
जिसपर चली थी मैं

अगर तुम आओगे
तुम अगर आओगे लौट कर
मुझे खोजते हुए किसी दिन

देखो!
सब कुछ बदल रहा है थोड़ा-थोड़ा हर पल
होता जा रहा है आडम्बरविहीन और आदिम
(जैसे बच्चों के बनाए हुए चित्र
जीवन के पहले-पहले रूप
आत्मा के अक्षर)

किसी गर्म जगह पर
कोमल और धुँधली सी जगह पर

तब वहाँ मैं नहीं दिखुँगी
वहाँ होगा एक जंगल
(मैं बन चुकी होऊँगी जंगल)


अँग्रेज़ी से अनुवाद : हेमन्त जोशी