Last modified on 17 सितम्बर 2011, at 15:00

मिलन / रजनी अनुरागी



मिलते हो जब तुम
खिल जाता है मन
छूते हो जैसे ही तन
भीतर से उठती है सिहरन
हम और मनुष्य हो जाते हैं
जब होता है मिलन