Last modified on 13 अक्टूबर 2015, at 21:25

मिलेंगे कभी / असंगघोष

कभी
किसी मोड़
पर
मिले तो
यह बढ़ते कदम
ठिठक जाएँगे।
कुछ क्षण

उसी वक्त याद आएगी
तुम्हारी हर करतूत
मेरी आँखों के
सामने तैर जाएगी
तुम्हारा हर अत्याचार

अपनी
अंगार आँखों से
उड़ेलूँगा
सारी नफरत
तुम पर,
और बढ़ जाऊँगा आगे।