भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मिस्टर के की दुनिया: पेड़ और बम-७ / गिरिराज किराडू

Kavita Kosh से
Gayatri Gupta (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:16, 2 अप्रैल 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=गिरिराज किराडू |अनुवादक= |संग्रह= }...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

घड़ियों से प्रेम मत करो
ट्रेनों से उससे भी कम
और भाषा से सबसे कम
जिस भाषा में तुम रोते हो वही किसी का अपमान करने की सबसे विकसित तकनीक है

तुम भाषा की शर्म में रहते हो
और वे चीख रहे हैं गर्व में
तुम्हारे पास अगर कुछ है तो अपने को बम में बदल देने का विकल्प
और तुम अभी भी सोचते हो बम धड़कता नहीं है
तुम अपने सौ एक सौ अस्सी के रक्तचाप को सम्भाल के रक्खो

एक हिंसक मौत की कामना हर अहिंसक की मजबूरी है
इसीलिये मजबूरी का नाम महात्मा गांधी है

घड़ी देखो और अपने रक्तचाप में डूब मरो