भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मुज़्तरिब दिल की कहानी और है / फ़सीह अकमल

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ३ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 22:32, 5 नवम्बर 2013 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=फ़सीह अकमल }} {{KKCatGhazal}} <poem> मुज़्तरिब द...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुज़्तरिब दिल की कहानी और है
कोई लेकिन उस का सानी और है

उस की आँखें देख कर हम पर खुला
ये शुऊर-ए-हुक्मरानी और है

ये जो क़ातिल हैं उन्हें कुछ मत कहो
इस सितम का कोई बानी और है

उम्र भर तुम शाइरी करते रहो
ज़ख़्म-ए-दिल की तर्जुमानी और है

हौसला टूटे न राह-ए-शौक़ में
ग़म की ऐसी मेज़बानी और है

मुद्दआ इज़हार से खुलता नहीं है
ये ज़बान-ए-बे-ज़बानी और है

आईने के सामने बैठा है कौन
आज मंज़र पर जवानी और है