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मुझे इन्तज़ार नहीं होता / गुँजन श्रीवास्तव

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मैं नहीं जानना चाहता औरों की तरह
पुनर्जन्म और
उसकी काल्पनिकता का रहस्य
और न सुनना चाहता हूँ ऐसे अफ़साने
जिसमें अनिश्चित हों स्वयं
उसके किरदार !

मुझे इन्तज़ार नहीं होता
किसी कहानी के दूसरे भाग के आने का
और न ही मैं देखता हूँ
शृंखलाओं वाली फ़िल्में

मैं ख़ुद को ख़त्म समझता हूँ
अपनी कहानी में
उसके आ्ख़िरी पन्ने पर
हमेशा - हमेशा को

नहीं चाहता कि याद रखा जाऊँ मैं
सदियों तक
बनाए जाएँ मेरी स्मृतियों में स्मारक
करूँ वो सब जिनके बाद रखे जाएँ मुझ पे
सड़कों के नाम
छपें, दीवारों पर मेरी तस्वीरें
मेरे नाम से छले कोई नेता
अनगिनत ग़रीबों और उनकी उम्मीदों को !!

नहीं होना चाहता मैं इस षड्यंत्र का शिकार
और न ही मरना चाहता हूँ उस अन्धविश्वास से
जिसकी आड़ में इनसानियत को निगल रही है
ख़ुदा बनने की चाहत
दिन प्रतिदिन !

मुझे मालूम है
मेरे किरदार का वजूद
मेरे पेट में रखी रोटी की देन है
और
मैं उस कहानी पर भरोसा नहीं करता
जिसे कल मैं ख़ुद
नहीं सुन सकता !