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"मुद्दा ए मुद्दई मतलब की बात / रविंदर कुमार सोनी" के अवतरणों में अंतर

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अँधेरे के पस परदा उजाला खोजता क्यूँ है
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मुद्दा मुद्दई मतलब की बात
जो अन्धा हो गया वो दिन में सूरज ढूँढता क्यूँ है
+
आप ने भी ख़ूब की मतलब की बात
  
बताया तो था लैला ने मगर सहरा नहीं समझा
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बे ग़रज़ दीवान्गान ए शौक़ हैं
कि मजनूँ रेतीले दर पर सर अपना फोड़ता क्यूँ है
+
कब कही, किस ने सुनी मतलब की बात
  
ये रोज़ ओ शब की गरदिश ही अगर है मक़सद ए हस्ती
+
होश में आने नहीं देते मुझे
तो सू ए आसमाँ ऊँची नज़र से देखता क्यूँ है
+
कह न दूँ मैं भी कोई मतलब की बात
  
ये माना हिज्र का ग़म तुझ पे तारी है दिल ए नादाँ
+
हो गया मायूस आख़िर दिल मिरा
जो आया है वो जाएगा तू नाहक़ सोचता क्यूँ है
+
हाए तू ने क्यूँ सुनी मतलब की बात
  
सहर होने को है शायद, सितारे हो गए मद्धम
+
कहते कहते दास्तान दर्द ए दिल
शब ग़म जा रही है तू अभी तक ऊँघता क्यूँ है
+
लब पे आ कर रुक गई मतलब की बात
  
यक़ीनन कुछ सबब था, तेरी ज़न्जीरें नहीं टूटीं
+
बात अच्छाई की भी सुनते नहीं  
मगर पा ए शिकस्ता राह से बन्धन तोड़ता क्यूँ है
+
जिन को है लगती बुरी मतलब की बात
  
ये दीवारें मिरे घर की खड़ी खामोश सुनती हैं
+
बुत ख़ुदा हो जाएंगे, उन से अगर
मेरे अन्दर छुपा जज़्बा अलम का बोलता क्यूँ है
+
ऐ रवि कह दें कभी मतलब की बात
  
जो तूफ़ानी हवाओं के मुक़ाबिल हो नहीं सकता
 
चलो देखें समुन्दर से वो आख़िर खेलता क्यूँ है
 
 
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16:19, 25 फ़रवरी 2012 का अवतरण

मुद्दा ए मुद्दई मतलब की बात
आप ने भी ख़ूब की मतलब की बात

बे ग़रज़ दीवान्गान ए शौक़ हैं
कब कही, किस ने सुनी मतलब की बात

होश में आने नहीं देते मुझे
कह न दूँ मैं भी कोई मतलब की बात

हो गया मायूस आख़िर दिल मिरा
हाए तू ने क्यूँ सुनी मतलब की बात

कहते कहते दास्तान ए दर्द ए दिल
लब पे आ कर रुक गई मतलब की बात

बात अच्छाई की भी सुनते नहीं
जिन को है लगती बुरी मतलब की बात

बुत ख़ुदा हो जाएंगे, उन से अगर
ऐ रवि कह दें कभी मतलब की बात