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मूला त एउटै ड्याङ्का रहेछन् / केदारमान व्यथित

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माथिदेखि
तलसम्मका सबैकै
शरीरमा
मात्र होइन कि
मन र मस्तिष्कसम्तमा पनि
हिलैहिलाका
टाटाहरु मात्र छन्,
तिमी नै भन, यस्तो स्थितिमा अब म
ककसलाइ मात्र भनूँ
महान् अथावा क्षुद्र ?