भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"मेरा प्रतिपल सुन्दर हो / सुमित्रानंदन पंत" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
छो ("मेरा प्रतिपल सुन्दर हो / सुमित्रानंदन पंत" सुरक्षित कर दिया ([edit=sysop] (indefinite) [move=sysop] (indefinite)))
 
(कोई अंतर नहीं)

11:55, 13 मई 2010 के समय का अवतरण

मेरा प्रतिपल सुन्दर हो,
प्रतिदिन सुन्दर, सुखकर हो,
यह पल-पल का लघु-जीवन
सुन्दर, सुखकर, शुचितर हो!

हों बूँदें अस्थिर, लघुतर,
सागर में बूँदें सागर,
यह एक बूँद जीवन का
मोती-सा सरस, सुघर हो!

मधुऋतु के कुसुम मनोहर,
कुसुमों की ही मधु प्रियतर,
यह एक मुकुल मानस का
प्रमुदित, मोदित, मधुमय हो!

मेरा प्रतिपल निर्भय हो,
निःसंशय, मंगलमय हो,
यह नव-नव पल का जीवन
प्रतिपल तन्मय, तन्मय हो!

रचनाकाल: जनवरी’ १९३१