भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मेहा बरसने को है शाबास / मालवी

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 15:40, 29 अप्रैल 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |रचनाकार=अज्ञात }} {{KKLokGeetBhaashaSoochi |भाषा=मालवी }} {{KK...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मेहा बरसने को है शाबास
बादल गरजने को है शाबास
बिजली चमकने को है शाबास
जच्चा तूने बिछियां पेरिया आज
सुवाग बड़ाने को शाबास
जच्चा तूने तोड़ा पेरिया आज
पिया के जगाने को शाबास
जच्चा तूने चुड़िलो पेरिया आज
पिया के रिझाने को शाबास
जच्चा तूने बेटा जाया आज
बंस बढ़ाने को शाबास
जच्चा तूने पीड़ी जाई आज
साजन बुलाने को शाबास