भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

मैंधी रा हाथ / राजेन्द्र जोशी

Kavita Kosh से
आशिष पुरोहित (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 22:25, 24 जुलाई 2018 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=राजेन्द्र जोशी |अनुवादक= |संग्रह=...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हाथां मांय मांड रैयी है
बा छोरी मैंधी
मुळकती-मुळकती
कोसीस करै ओळखण री
उण उणियारै नै
जिको आपरै सागै
लेय'र जावैला अठारै दिनां पछै।

ज्यूं-ज्यूं मैंधी रचैला
छोरी रै हाथां
रच्योड़ी
मैंधी मांयकर पळकैला
बो उणियारो।

अंधारै री रात मांय
रच्योड़ी मैंधी रा हाथ
ध्रुव तारो ऊगै है
छोरी रै हाथां
उण उणियारै भेळो।

छोरी रा हाथ
हाथ नीं है
जीवण रा सुपना है
मैंधी रा हाथ।