भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

मैं तुझे प्यार करता हूँ औ’ आकाश को ... / वलेरी ब्रियूसफ़ / अनिल जनविजय

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 00:11, 19 नवम्बर 2021 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=वलेरी ब्रियूसफ़ |अनुवादक=अनिल जन...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मैं तुझे प्यार करता हूँ औ’ आकाश को, सिर्फ़ तुझे और वह जो है आसमान
दोहरे प्यार में जीता हूँ मैं, सांस लेता हूँ उस प्यार में, जो है पूरा भासमान ।

उस अनन्त उज्ज्वल आकाश में, झाँकता है जो आँखों में तेरी प्यारी-प्यारी
टकटकी लगा देखती हो तू वह आसमान, जो हम पर हो जाता है बलिहारी

मैं देखता हूँ फैला वितान आसमान का और वो मेरी नज़रों को थाम लेता है
उसकी आँखों में झाँकता हूँ, मापता हूँ दूरी, वो दूरी समय की पहचान लेता है

वह अतल आकाश है, निगाहों के रसातल में औ हंस सा लहरों पर तरता हूँ मैं
दोहरे अतल-वितल के बीच ही किसी जगह पर तुम्हारे सपनों में उभरता हूँ मैं

ज़मीन पर पड़े हुए करें आरोहण आकाश का, हम प्यार की ताने हुए कमान
मैं तुझे प्यार करता हूँ औ’ आकाश को, सिर्फ़ तुझे और वह जो है आसमान

26 जून 1897

मूल रूसी भाषा से अनुवाद : अनिल जनविजय

लीजिए, अब यही कविता रूसी भाषा में पढ़िए
               Валерий Брюсов
            Я люблю тебя и небо ...

Я люблю тебя и небо, только небо и тебя,
Я живу двойной любовью, жизнью я дышу, любя.

В светлом небе — бесконечность: бесконечность милых глаз.
В светлом взоре — беспредельность: небо, явленное в нас.

Я смотрю в пространства неба, небом взор мой поглощен.
Я смотрю в глаза: в них та же даль — пространств и даль времен.

Бездна взора, бездна неба! я, как лебедь на волнах,
Меж двойною бездной рею, отражен в своих мечтах.

Так, заброшены на землю, к небу всходим мы, любя...
Я люблю тебя и небо, только небо и тебя.

26 июня 1897