भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

म्हारी धरती / रेंवतदान चारण

Kavita Kosh से
आशिष पुरोहित (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:09, 8 मई 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=रेंवतदान चारण |अनुवादक= |संग्रह=...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

म्हारी धरती री कुण होड करै
आ माटी है अंगारां री
वीरां रणबंका जोधां री
आ जांमण है जूंझारां री
सूरां री वांणी राजस्थांनी
कवि कंठां पोथ्यां कथ्योड़ी
धोरां मगरां अर डूंगरियां
पग पग पूतळियां थरप्योड़ी
ख्यातां बातां इतियासां
जुग जुग री सांसां रच्योड़ो
राती माटी भाटा राता
माथां री हाटां सज्योड़ी
भालां तीरां अर ढालां री
आ रण भोम तरवारां री

म्हारी धरती री कुण होड करै
आ माटी है अंगारां री
वीरां रणबंका जोधां री
आ जांमण है जूंझारां री

मातभोम री आजादी रा
कण कण में ऊग्या बीज अठै
फूली अर पसरी अमर बेल
रण रण सींच्यौ रगत जठै
चण्डी गळ गूंथण रूंडमाळ
अणगिण आदरिया सीस अठै
बाकी धरती आ वाइज है
रज रज में जूंझ्या वीर जठै
भाटा भाटा में कुर्योड़ी
अणदीठी छिब उणियारां री

म्हारी धरती री कुण होड करै
आ माटी है अंगारां री
वीरां रणबंका जोधां री
आ जांमण है जूंझारां री

रे मांन तोलती ताकड़ियां
वां डांडी लुळती लागै है
रे नींद कोयनी आंखड़ियां
बरसां सूं बैठौ जागै है
माथां रा मोल करण वाळी
पेढ़ी रै ढबकौ लागै है
रे इण नै कुण रोही कैवै
मिनखां री बस्ती आगै है
थोथी थळियां में थाकी है
आ बाळद क्यूं बिणजारां री

म्हारी धरती री कुण होड करै
आं माटी है अंगारां री
वीरां रणबंका जोधां री
आ जांमण है जूंझारां री
अंगारा बुझग्या भोभर में
क्यूं माटी ठाडी पड़गी है
बेमाता कीकर बीसरगी
मिनखा तन काचा घड़गी है
सींच्योड़ी तन रै लौही सूं
वै साखां आज उजड़गी है
घण मूंघै मोल कमाई ही
वा सगळी पैठ बिगड़गी है
सागै सज्योड़ी अै हाटां
क्यूं लूटीजै मिणियारां री
म्हारी धरती री कुण होड करै
आ माटी है अंगारां री
वीरां रणबंका जोधां री
आ जामण है जूंझारां री

मोट्यार मरण मनवार करै
जद काटक राटक माचैला
संभियोड़ा मिळसी कुरूखेतर
कळजुगं रा करसण साचैला
बाजैला जिण पुळ रणभेरी
तिरलोकी तांडव नाचैला
गीता जद पिरथी परळै री
धरती रौ कण कण बांचैला
त्रंबाल नगारा सिंघनाद
आ हेवा है होकारां री

म्हारी धरती री कुण होड करै
आ माटी है अंगारां री
वीरां रणबंका जोधां री
आ जांमण है जुंझारां सूं