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रंग खोजती होली / संजय अलंग

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मितान !
इस बार होली आएगी कैसे?
उसे कैलेण्डर में खूनी लाल या
जली काली तारीख़ें ही मिलीं हैं

वह अब भी
बच्चे के हाथ में रंग की
सोच रही है

मैं सोचता हूँ
उसे, ख़ौफ हटाकर
शरारत दे ही दूँ

तुम भी दोगे क्या? या
उसे अब लौटा ही दें?