भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

राजनीति सिखलाय दे / नंदकिशोर शर्मा

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 01:47, 2 जुलाई 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=नंदकिशोर शर्मा |अनुवादक= |संग्रह=...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गे मइयो, गे मइयो हमरा राजनीति सिखलाय दे
केन्ना मिलतै धन कुबेर के छू मंतर बतलाय दे
गे मइयो, गे मइयो हमरा राजनीति सिखलाय दे।

आब न कुच्छो करबो मइयों एक खोरहा नै पढ़बौ मइयो
कलवतिया के बेटा जैसन सीना तान्ने चलवौ मइयो
दू पैजामा, दू गो कुरता ढिल्लमढील सिलाय दे
गे मइयो, गे मइयो हमरा राजनीति सिखलाय दे।

लालटेन हम साथे रखबै, बंगला में सुस्तैबै मइयो
तरकस तीर बगल में हँसुआ हों में हों मिलैबै मइयो
बात-बात में हाथ देखैबै, कमल के फूल देलाय दे
गे मइयो, गे मइयो हमरा राजनीति सिखलाय दे।

झूठा वादा धंधा मइयो, तीन लाख बस चंदा मइयो,
घोटाला-घोटाला खेलवौ जगत बनैवौ अंधा मइयो
कूदैबाला मंच सें मइयो, तोय कसरत बताय दे
गे मइयो, गे मइयो हमरा राजनीति सिखलाय दे।

दंगा हम्हीं करैबौ मइयो, हैंस के दाँत देखैबौ मइयो
सनकल जब सरकारी कुतबा सान्हीं में घुसि जैबौ मइयो
छिपकेॅ भागवौ कुरती पिन्हीं तोंय ओढ़नी ओढ़ाय दे
गे मइयो, गे मइयो हमरा राजनीति सिखलाय दे।

देवै दनादन चुटकी भाषण, हरदम हम मुस्कै लै सिखवै
ताबरतोड़ प्रश्न के उत्तर, बात-बात छिटकै लै सिखवै
कोना कोनी भागैवाला तोंय तरकीब बताय दे
गे मइयो, गे मइयो हमरा राजनीति सिखलाय दे।