भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रामनगर से नानी आईं / श्रीप्रसाद

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:57, 20 फ़रवरी 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=श्रीप्रसाद |अनुवादक= |संग्रह=मेरी...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रा रा रा रा रा रा!
रामनगर से नानी आईं
लाईं बिल्ली कानी
लेकिन वह थी बड़ी पुरानी
पक्की चूहेखानी
सुबह चार चूहे खाती थी
फिर जपती थी माला
चुहियाँ रखती अलमारी में
जड़ जाती थी ताला

रा रा रा रा रा रा!
बलबल बलबल ऊँट बोलता
गदहा गाता गाना
बार-बार कोयल कहती,
जी फिर से जरा सुनाना
ऊँट समझकर चुपा गया, पर
गदहा समझ न पाया
हेंचू हेंचू हेंचू हेंचू भारी शोर मचाया
रा रा रा रा रा रा रा!

मुरगा बोला ठीक समय पर
मगर न मुरगा जागा
बोला, सूरज अभी न निकला
तब फिर बोला कागा
बिस्तर में से आँखें खोलीं
देखा, बादल छाया
टन टन टन दीवाल घड़ी ने
बारह तभी बजाया
रा रा रा रा रा रा रा!

मैं खाता हूँ चार चपाती
कहने लगे कन्हाई
मैं दो खाकर उठ जाता हूँ
बोले उनके भाई
पर जब दोनों खाने बैठे
बिगड़ गया हलवाई
आठ किलो आटे की पूड़ी
इन दोनों ने खाई
रा रा रा रा रा रा रा!

दुनिया में कितने अचरज हैं
हाथी कितना भारी
शुतुरमुर्ग कहता, गर्दन में
मेरी शोभा सारी
पेड़ बड़ा होता इमली का
फल होता है छोटा
मेरे दादा से दूना है
उनका भारी सोटा।