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रिश्ते-4 / निर्मल विक्रम

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कुछ रिश्ते
टूट जाते हैं
छूट जाते हैं
लम्बे रास्ते ख़त्म हो जाते हैं
चलते-चलते थक जाता है मनुष्य
रह जाते हैं काले अंधेरे साए जैसे
यादों के लाल सुनहरी ख़्वाब
कुछ रिश्ते टूट जाते हैं

मूल डोगरी से अनुवाद : पद्मा सचदेव