भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रेल / श्रीनाथ सिंह

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 03:00, 4 जुलाई 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=श्रीनाथ सिंह |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KK...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

भक भक करती धुआं उड़ाती,
वह आ रही रेल चिल्लाती।
टन टन टन टन घंटा बोला,
जल्दी टिकट खरीदो भोला।
भीड़ हुई लोगों की भारी।
जल्दी में हैं सब नर नारी।
देखो कहीं न रह जाएँ हम,
केवल धक्का ही खाएं हम।
अजी जेब में पुस्तक डालो,
पहले निज असबाब संभालो।
ओहो यह न लाल गाड़ी है,
धोखा हुआ, मॉल गाड़ी है।