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वतन से दूर हूँ लेकिन / भावना कुँअर

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वतन से दूर हूँ लेकिन

अभी धड़कन वहीं बसती

वो जो तस्वीर है मन में

निगाहों से नहीं हटती।


बसी है अब भी साँसों में

वो सौंधी गंध धरती की

मैं जन्मूँ सिर्फ भारत में

दुआ रब से यही करती।


बड़े ही वीर थे वो जन

जिन्होंने झूल फाँसी पर

दिला दी हमको आजादी।

नमन शत-शत उन्हें करती।