भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"वाह रे मनखे तय / किशोर कश्यप" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=किशोर कश्यप |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCa...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
(कोई अंतर नहीं)

00:48, 15 अगस्त 2019 के समय का अवतरण

मनखे मन हा मनखे ला मारे के
उपाय खोज डारिन हे
परगति के नाव ले लेके
मनखे के दुरगति कर डारिन हे

बड़े बड़े घर बनाइन
अब जगा होवत हे कम
जीये बर आनी बानी के दवा त
मनखे मारे बार हे बम

अतका बड़ पीरिथवी ला
छोट कुन कर डारिन हे
डोंगरी ला कोन पूछय
चंदा मां पांव मड़हाइन हे

चिरी साही मनखे
आज हवा में उड़हावत हे
पानी मां मंगर साही
जिनगी पहावत हे

अरे मनुख तय महाभारत के संजय साही
घर बइठे झगरा देखत हस
परदेस मा होवत हे क्रिकेट
अउ तय इहां से मंजा लेवत हास

सबो बात तो बने बने
फेर काबर तय इंसानियत ल खोवात हस
मनखे मनखे बाटि क बांटा होयके
देव धामी ला घलो बांट दारत हस