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विकासक तक्काहेरी मे / विकाश वत्सनाभ

इएह छैक ओकर परिचय
ओ छैक
अहि मुलुक केर कुम्हार
चेतनाक सुतल हाहाकार
मैंजनक बोनिहार
किछु कहियौ अहाँ
ओकरा लेल धन्नो सन
ओ कुटि रहल अछि अपन करम
पीसि रहल अछि नियतिक चिक्कस
मुँहदुसैत सामाजिक सरोकार के
लुटियंस केर दिल्ली के
खाधि बला पैकार के
निमग्न अछि अपना के थौंसबा मे
गड़ि गेल छै ओकर सेहन्ता
अट्टालिकाक नौ' मे
ओ माथ परक छिट्टा मे
खेपे खेपे
फेक' चाहैत छैक जिनगीक संताप
ओकरा आब डँसैत छैक
गेंद आ झुनझुना
जुआ गेल छैक खिच्चे मे
ओकर हार-पाँजर
ओ बिसरि गेल छैक इसकूल
ओकरा नहि उसरैत छैक
ककहरा आ खाँत
मुदा अखियास छैक ओकरा
जोरबाक
मायक दबाई /बहिनक ओढ़नी
पेठिया सौं अनबाक छै
मडुआ /बाबूक पीनी
ओ सुनैत छै मालिकक रेडियो मे
अपना दिया किदन-कहाँदन
आ फेर कुनु जोगिराक टेर मे
चुनबैत छैक खैनी
नोंइश लैत छैक माहुर
परतारि लैत छैक मन के
आ उघ' लगैत छैक जिनगी
चिन्हलियै ओकरा ?
हँ ! हँ !
ओएह छैक अहि मुलुक केर कुम्हार
फज्जति/अभाव ओकर भजार
जौं नहि खदकैत अछि अहाँक खून
ओकर आवाक' ताप सँ
त गढ़ दियौ ओकरा
सूर्पनखा सन सुरेबगर भारत
आहाँ बैसल पिटू थपड़ी
देखैत रहू "महा-भारत"
विकासक तक्काहेरी मे ।