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विदाई की सीख / रेखा चमोली

सुनों बिटिया
हमारे पास कुछ नहीं सिवाय इज्जत के
यही कमायी है उम्र भर की
किसी का बुरा न किया
किसी का हक नहीं मारा
सबसे बना के रखी
तभी खा पा रहें हैं दो रोटी
बेटी तो होती ही पराया धन
तुम्हारे पैदा होने के क्षण से ही
तुम्हारी विदाई की सोच
एक फॉस सी चुभती रही भीतर
ज्यादा तेज लडकियां बिगाड देती हैं कुल को
कलह होता है
इसीलिए धरती माता कहा जाता बेटियों को
सात बुद्धि होती है लडकी के पास
संभाल लेती है सब कुछ
देखो, सुनो कहाँ उठ कर चल दीं
मुँह ना फुलाओ
तुम्हारे भले को कह रहे हैं
मान जाओ बिटिया
कुछ नहीं हमारे पास सिवाय इज्जत के
भरोशा है तुम पर
कुछ ऊॅच नींच हो जाए तो संभाल लोगी
सब कितनी तारीफ करते हैं
गऊ समान बिटिया है तुम्हारी
जा रही हो दूसरे घर
याद रखना बिटिया
चिता के साथ ही जाए तुम्हारी रुलाई
तुम्हारे दर्द तुम्हारे साथ ही जलें
और जो धुआँ उठे वो भी उजला ही हो
इसीलिए
कभी उफ न करना बिटिया
लाज रख लेना हमारी।