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विरोधाभाष / विनोद पाराशर
Kavita Kosh से
आशिष पुरोहित (वार्ता | योगदान)ने किया हुवा 13:38, 21 नवम्बर 2011का अवतरण
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वो हमें
निर्धन ऒर गरीब
बताते हॆं।
ऊपर उठाने के लिए
सुन्दर,सुकोमल-स्वप्न
दिखाते हॆं।
लेकिन अफसोस-
हमारे सामने ही
झोली फॆलाते हॆं।