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विशेषण मैं / रामनरेश पाठक

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शब्द, लय, गति, और अर्थ
इतिहास पी गया है

मेरी छठी इन्द्रिय और मेरे तीसरे नेत्र के बीच भी
अब कोई रचना नहीं है

घड़ी मानवीय ईकाई की है आदि शक्ति
डायरियों के पन्नों में
विकास की नेपथ्य-लेखा रखती है

विचार और अनुभूति के रहस्यावकाशों के साक्षी
तेरह हज़ार पाँच सौ पाँच दिनों तक जीवित अश्वत्थ
देह और माथे पर उगी रेखाओं की गहराई का महाकाव्य
व्यष्टि की इयत्ता का गोरोचन
समष्टि के विवेक को समर्पित है अब

मेरे जन्म और मृत्यु के बीच पसरी
इस मुखविहीन सड़क पर उग आने वाले
नए अश्वत्थ के प्रश्नों का उत्तर नहीं है
नहीं है...नहीं है...नहीं है

किसी भी अनुवाद या अनुकरण के हेतु अप्रस्तुत
संयंत्र बृहस्पति का शेष संजयत्व
विशाल मरुस्थलों, ज्वालामुखियों और
सुनसान निर्जन विश्वों का अभ्शाप लिखता है
वायुमंडल, मेघ, ऋतु, झंझा-शम्पाएँ, धड़कनें
ताप, तनाव, प्रवाह, आकर्षण, महत्त्व, संगीत
सृप, वृक्ष, तृण, पुष्प, पशु, हरितिमायें, देखता नहीं है

चित्र, सूचना, रंग, आयाम की सार्थकता-निरर्थकता के परे
एक विराट अनस्तित्व में संलीन संस्कृति की
सृष्टि-संज्ञा सविता का विशेषण मैं
                          विशेषण मैं !!
                          विशेषण मैं !!!