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होली है / लाल्टू

21 bytes added, 13:40, 15 मार्च 2011
|रचनाकार=लाल्टू
|संग्रह=
}}<poem>{{KKAnthologyHoli}}भरी बहार सुबह धूप
धूप के सीने में छिपे ओ तारों नक्षत्रों
फागुन रस में डूबे हम