भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"शिव / शिवदीन राम जोशी" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
 
(इसी सदस्य द्वारा किया गया बीच का एक अवतरण नहीं दर्शाया गया)
पंक्ति 4: पंक्ति 4:
 
|
 
|
 
}}
 
}}
{{KKCatShiv}}
+
{{KKCatKavitt}}
 +
{{KKAnthologyShiv}}
 
<poem>
 
<poem>
 
शिवजी हैं दयाला ललाट चन्द्र का उजाला,
 
शिवजी हैं दयाला ललाट चन्द्र का उजाला,
पंक्ति 23: पंक्ति 24:
 
शिवदीन सदा शिव सहायक है,  
 
शिवदीन सदा शिव सहायक है,  
 
               वर दायक दानी वे दाता हमारा |
 
               वर दायक दानी वे दाता हमारा |
 +
=======================================================
 +
              (सवैया छंद )
 +
शिव शीश पे गंग तरंग सजे शुभ साजत है तेरे जूट जटा |
 +
अहि नाग गले लपटैं झपटैं गन राज चढ़े  कैलाश अटा |
 +
भंग के रंग में भूतों के संग में शंकर धन्य उमा की छटा |
 +
शिवदीन सुप्यार सुधा बरषे महादेव लखे नभ माहीं घटा |
 +
 
<poem>
 
<poem>

19:57, 13 जनवरी 2013 के समय का अवतरण

शिवजी हैं दयाला ललाट चन्द्र का उजाला,
                 हाथ त्रिशूल और भाला, गले सर्पन की माला है |
धोले बैल वाला, पिये भंग हूं का प्याला,
                  शीश गंग की तरंगे, पाप जारबे की ज्वाला है |
बाघम्बर धारे, नेत्र तीसरा उघारे,
                    कामदेव को पछारे, शिव शंकर मतवाला है |
कहता शिवदीन लाल, दीनन की करत पाल,
                    ऐसे शिव दयाल, सत्य देवन में निराला है |
=======================================================
शिव मस्तक चन्द्र बिराज रह्यो,
               अहिराज गले शिर गंग की धारा |
मृगछाल बाघम्बर आसन की,
                 छवि छाज रही अहो अपरंपारा |
बाज रही डमरू कर में,
              व आवाज भली जग जानत सारा |
शिवदीन सदा शिव सहायक है,
               वर दायक दानी वे दाता हमारा |
=======================================================
              (सवैया छंद )
शिव शीश पे गंग तरंग सजे शुभ साजत है तेरे जूट जटा |
अहि नाग गले लपटैं झपटैं गन राज चढ़े कैलाश अटा |
भंग के रंग में भूतों के संग में शंकर धन्य उमा की छटा |
शिवदीन सुप्यार सुधा बरषे महादेव लखे नभ माहीं घटा |